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Tuesday, September 25, 2012

भारत में विदेशी किराना स्टोर के मायने

हाल ही में प्रधानमंत्री ने  भारतीय खुदरा बाजार में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में एकल ब्रांड में १००% व मल्टीब्रांड में ५१% निवेश की अनुमती दी | इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये आर्थिक सुधारों कि सज्ञां दि जा रही है| इसके पक्ष और विपक्ष में अनेक चर्चाओं चली वदोनों तरफ  से अपने अपने तर्क दिए | प्रधानमंत्री ने देश के  नाम संबोधन में अपना पक्ष रखा और आर्थिक सुधारों के  सकारात्मक प्रभाव का भरोसा दिलाया|

बताया जा रहा कि इससे किसानों को अपने उत्पादन कि अच्छी कीमत मिलेगी तथा नई तकनीक उपलब्ध होगी| लेकिन आंकड़े बताते ह कि अमेरिका इंगलैंड मेक्सिको में अफडीआई कि नीतियों से तंग आकर किसान  कर्षि वयवसाय को छोड़ रहे ह|  बताया जा रहा
 ह कि इससे बिचोलिये के हट जाने से उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को फायदा मिलेगा पर सवालयह कि ये बिचोलीये कोन ह ये हम में से ही कुछ लोग ह जो परिवहन व स्टोर करने का काम करते ह तो इसमे  इनको रोजगार मिल जाने में बुराई क्या ह ?  पर विपक्ष  का तर्क ये कि इससे उत्पाद महंगा हो जाता ह इस पर मेरा तर्क  ये ह कि अभी हमारे देश जो स्टोर ह वो कोनसे सस्ते उत्पाद उपलब्ध करा रहे ह  RELIANCE BIG BAJAR  MOREआदि इनके बीच तो बिचोलिये भी नहीं ह तो क्या गारंटी ह कि FDI RETAIL के आने से सस्ते उत्पाद उपलब्ध होंगे|

FDI RTAIL के आने से  बताया जा रहा ह कि रोजगार में अवसर बढ़ेंगे परन्तु भारतीय खुदरा बाजार 4करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता ह इसका विकल्प fdi retail नहीं हो सकताहै | 4करोड़ लोगों का रोजगार  FDI RETAIL  शायद सारे विश्व  में नहीं देता होगा

विदेशी किराना  स्टोर के आने से  भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश होगा  इससे हमारी अर्थव्यवस्था मजबूतहोगी पर ये लोग ये भूल जाते ह कि विदेशी किराना  स्टोर 70% उत्पाद विदेशों से आयात करेगीं इससे भारतीय मुद्रा विदेशों में जाएगी रुपए का मूल्य गिरेगा | भारतीय उधोग चोपट होंगे  और हम कहते ह अर्थव्यवस्था मजबूत होगी

एक बार सोचने कि जरूरत है|

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