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बहुब्रांड खुदरा कारोबार में सरकार ने एफडीआई को लेकर जो चर्चा पत्र पेश किया है, वह कुछ और नहीं बल्कि घरेलू खुदरा कारोबार को पूंजीवाद के कड...
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"मेरा जनाजा निकला उनकी गली से तो सारा जहां निकला जिसके लिये मेरा जनाजा निकला वह कम्बख्त घर से न निकला"
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सन 1911 तक भारत की राजधानी बंगाल हुवा करता था सन 1911 में जब बंगाल विभाजन को लेकर अंग्रेजो के खिलाफ बंग-भंग आन्दोलन के विरोध में बंगाल के...
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''या तो सरगां ने सरमावे, इण पर देव रमण ने आवे। इणरो यश नर-नारी गावे, धरती धोराँ री, मीठा मोराँ री''
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WINDOWS KEY + E के से आप My Computer खोल सकते हैं। कंट्रोल बटन दबाए रखते हुए किसी भी फाइल को माउस से ड्रैग करें। उसकी एक और कॉपी बन जाएगी...
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Friday, August 6, 2021
Sunday, July 25, 2021
Tuesday, January 29, 2013
आम आदमी
एक बार जरुर पढ़े -:
नाव चली जा रही थी। बीच मझदार में नाविक ने कहा,
"नाव में बोझ ज्यादा है, कोई एक आदमी कम हो जाए तो अच्छा, नहीं तो नाव डूब जाएगी।"
अब कम हो जए तो कौन कम हो जाए? कई लोग तो तैरना नहीं जानते थे: जो जानते
थे उनके लिए नदी के बर्फीले पानी में तैर के जाना खेल नहीं था। नाव में सभी
प्रकार के लोग थे-,अफसर,वकील,, उद्योगपति,नेता जी और उनके सहयोगी के अलावा
आम आदमी भी। सभी चाहते थे कि आम आदमी पानी में कूद जाए।
उन्होंने आम आदमी से कूद जाने को कहा, तो उसने मना कर दिया। बोला,
जब जब मैं आप लोगो से मदत को हाँथ फैलता हूँ कोई मेरी मदत नहीं करता जब तक
मैं उसकी पूरी कीमत न चुका दूँ , मैं आप की बात भला क्यूँ मानूँ? "
जब आम आदमी काफी मनाने के बाद भी नहीं माना, तो ये लोग नेता के पास गए, जो
इन सबसे अलग एक तरफ बैठा हुआ था। इन्होंने सब-कुछ नेता को सुनाने के बाद
कहा,
"आम आदमी हमारी बात नहीं मानेगा तो हम उसे पकड़कर नदी में फेंक देंगे।"
नेता ने कहा,
"नहीं-नहीं ऐसा करना भूल होगी। आम आदमी के साथ अन्याय होगा। मैं देखता हूँ उसे -
नेता ने जोशीला भाषण आरम्भ किया जिसमें राष्ट्र,देश, इतिहास,परम्परा की
गाथा गाते हुए, देश के लिए बलि चढ़ जाने के आह्वान में हाथ ऊँचा करके कहा,
ये नाव नहीं हमारा सम्मान डूब रहा है
"हम मर मिटेंगे, लेकिन अपनी नैया नहीं डूबने देंगे…नहीं डूबने देंगे…नहीं डूबने देंगे"….
सुनकर आम आदमी इतना जोश में आया कि वह नदी के बर्फीले पानी में कूद पड़ा।
"दोस्तों पिछले 65 सालो से आम आदमी के साथ यही तो होता आया है "
Saturday, January 26, 2013
जन गण मन की अदभुद कहानी ......इस गान का मतलब है..... अंग्रेजो तुम्हारी जय हो
सन
1911 तक भारत की राजधानी बंगाल हुवा करता था सन 1911 में जब बंगाल विभाजन
को लेकर अंग्रेजो के खिलाफ बंग-भंग आन्दोलन के विरोध में बंगाल के लोग उठ
खड़े हुवे तो अंग्रेजो ने अपने आपको बचाने के लिए बंगाल से राजधानी को
दिल्ली ले गए और दिल्ली को राजधानी घोषित
कर दिया पूरे भारत में उस समय लोग विद्रोह से भरे हुवे थे तो अंग्रेजो ने
अपने इंग्लॅण्ड के राजा को भारत आमंत्रित किया ताकि लोग शांत हो जाये
इंग्लैंड का राजा जोर्ज पंचम 1911 में भारत में आया
अंग्रेजो के द्वारा रविंद्रनाथ टेगोर पर दबाव बनाया कि तुम्हे एक गीत जोर्ज पंचम के स्वागत में लिखना ही होगा मजबूरी में रविंद्रनाथ टेगोर ने बेमन से वो गीत लिखा जिसके बोल है - जन गण मन अधिनायक जय हो भारत भाग्य विधाता .... जिसका अर्थ समझने पर पता लगेगा कि ये तो हकीक़त में ही अंग्रेजो कि खुसामद में लिखा गया था इस राष्ट्र गान का अर्थ कुछ इस तरह से होता है -
" भारत के नागरिक, भारत की जनता अपने मन से आपको (अंग्रेजो को) भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है हे अधिनायक (तानाशाह/सुपर हीरो) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो तुम्हारी जय हो ! जय हो ! जय हो ! तुम्हारे भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब सिंध गुजरात महारास्त्र, बंगाल आदि और जितनी भी नदियाँ जैसे यमुना गंगा ये सभी हर्षित है खुश है प्रसन्न है ............. तुम्हारा नाम लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है तुम्हारी ही हम गाथा गाते है हे भारत के भाग्य विधाता (सुपर हीरो ) तुम्हारी जय हो! जय हो ! जय हो ! "
रविन्द्र नाथ टेगोर के बहनोई, सुरेन्द्र नाथ बनर्जी लन्दन में रहते थे और IPS ऑफिसर थे अपने बहनोई को उन्होंने एक लैटर लिखा इसमें उन्होंने लिखा है कि ये गीत जन गण मन अंग्रेजो के द्वारा मुझ पर दबाव डलवाकर लिखवाया गया है इसके शब्दों का अर्थ अच्छा नहीं है इसको न गाया जाये तो अच्छा है लेकिन अंत में उन्होंने लिख दिया कि इस चिठ्ठी को किसी को नहीं बताया जाये लेकिन कभी मेरी म्रत्यु हो जाये तो सबको बता दे
जोर्ज पंचम भारत आया 1911 में और उसके स्वागत में ये गीत गया गया जब वो इंग्लैंड चला गया तो उसने उस जन गण मन का अंग्रेजी में अनुवाद करवाया क्योंकि जब स्वागत हुवा तब उसके समझ में नहीं आया कि ये गीत क्यों गाया गया जब अंग्रेजी अनुवाद उसने सुना तो वह बोला कि इतना सम्मान और इतनी खुशामद तो मेरी आज तक इंग्लॅण्ड में भी किसी ने नहीं की वह बहुत खुश हुवा उसने आदेश दिया कि जिसने भी ये गीत उसके लिए लिखा है उसे इंग्लैंड बुलाया जाये रविन्द्र नाथ टैगोरे इंग्लैंड गए जोर्ज पंचम उस समय नोबल पुरुष्कार समिति का अध्यक्ष भी था उसने रविन्द्र नाथ टैगोरे को नोबल पुरुष्कार से सम्मानित करने का फैसला किया तो रविन्द्र नाथ टैगोरे ने इस नोबल पुरुष्कार को लेने से मना कर दिया क्यों कि गाँधी जी ने बहुत बुरी तरह से रविन्द्रनाथ टेगोर को उनके इस गीत के लिए खूब सुनाया टेगोर ने कहा कि आप मुझे नोबल पुरुष्कार देना ही चाहते हो तो मैंने एक गीतांजलि नामक रचना लिखी है उस पर मुझे दे दो जोर्ज पंचम मान गया और रविन्द्र नाथ टेगोर को सन 1913 में नोबल पुरुष्कार दिया गया उस समय रविन्द्र नाथ टेगोर का परिवार अंग्रेजो के बहुत नजदीक था
जब सन 1919 में जलियावाला बाग़ का कांड हुवा, जिसमे निहत्थे और निर्दोष लोगों पर अंग्रेजो ने गोलिया बरसाई तो गाँधी जी ने एक चिट्ठी रविन्द्र नाथ टेगोर को लिखी जिसमे शब्द-शब्द में गालियाँ थी फिर गाँधी जी स्वयं रविन्द्र नाथ टेगोर से मिलने गए और बहुत जोर से डाटा कि अभी तक अंग्रेजो की अंध भक्ति में डूबे हुवे हो? अब भी अगर तुम्हारी ऑंखें नहीं खुली तो कब खुलेगी ? इस काण्ड के बाद टेगोर ने विरोध किया और नोबल पुरुष्कार अंग्रेजी हुकूमत को लौटा दिया सन 1919 से पहले जितना कुछ भी रविन्द्र नाथ टेगोर ने लिखा वो अंग्रेजी हुकूमत के पक्ष में था और 1919 के बाद उनके लेख कुछ कुछ अंग्रेजो के खिलाफ होने लगे थे 7 अगस्त 1941 को उनकी म्रत्यु हो गई और उनकी म्रत्यु के बाद उनके बहनोई ने रविंद्रनाथ टेगोर के कहे अनुसार वो चिट्ठी सार्वजनिक कर दी
1941 तक कांग्रेस पार्टी थोड़ी उभर चुकी थी लेकिन वह दो खेमो में बाँट गई जिसमे एक खेमे के समर्थक बाल गंगाधर तिलक थे और दूसरे खेमे में मोती लाल नेहरु थे मतभेद था सरकार बनाने का मोती लाल नेहरु चाहते थे कि स्वतंत्र भारत की सरकार अंग्रेजो के साथ कोई संयोजक सरकार बने जबकि गंगाधर तिलक कहते थे कि अंग्रेजो के साथ मिलकर सरकार बनाना तो भारत के लोगों को धोखा देना है इस मतभेद के कारण लोकमान्य तिलक कांग्रेस से निकल गए और गरम दल इन्होने बनाया कोंग्रेस के दो हिस्से हो गए एक नरम दल और एक गरम दल गरम दल के नेता थे लोकमान्य तिलक, लाला लाजपत राय ये हर जगह वन्दे मातरम गाया करते थे और गरम दल के नेता थे मोती लाल नेहरु लेकिन नरम दल वाले ज्यादातर अंग्रेजो के साथ रहते थे उनके साथ रहना, उनको सुनना , उनकी मीटिंगों में शामिल होना हर समय अंग्रेजो से समझोते में रहते थे वन्देमातरम से अंग्रेजो को बहुत चिढ होती थी नरम दल वाले गरम दल को चिढाने के लिए 1911 में लिखा गया गीत जन गण मन अपने हर समारोह में गाया करते थे
नरम दल ने उस समय एक वायरस छोड़ दिया कि मुसलमानों को वन्दे मातरम नहीं गाना चाहिए क्यों कि इसमें बुतपरस्ती (मूर्ती पूजा) है और आप जानते है कि मुसलमान मूर्ति पूजा के कट्टर विरोधी है उस समय मुस्लिम लीग भी बन गई थी जिसके प्रमुख मोहम्मद अली जिन्ना थे उन्होंने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया और मुसलमानों को वन्दे मातरम गाने से मना कर दिया इसी झगडे के चलते सन 1947 को भारत आजाद हुआ
जब भारत सन 1947 में आजाद हो गया तो जवाहर लाल नेहरु ने इसमें राजनीति कर डाली संविधान सभा की बहस चली जितने भी 319 सांसद थे उनमे से 318 सांसद ने बंकिमदास चटर्जी द्वारा लिखित वन्देमातरम को राष्ट्रगान स्वीकार करने पर सहमती जताई बस एक सांसद ने इस प्रस्ताव को नहीं माना और उस एक सांसद का नाम था पंडित जवाहर लाल नेहरु वो कहने लगे कि क्यों कि वन्दे मातरम से मुसलमानों के दिल को चोट पहुंचती है इसलिए इसे नहीं गाना चाहिए (यानी हिन्दुओ को चोट पहुंचे तो ठीक है मगर मुसलमानों को चोट नहीं पहुंचनी चाहिए)
अब इस झगडे का फैसला कोन करे ? तो वे पहुचे गाँधी जी के पास गाँधी जी ने कहा कि जन गण मन के पक्ष में तो मै भी नहीं हूँ और तुम (नेहरु ) वन्देमातरम के पक्ष में नहीं हो तो कोई तीसरा गीत निकालो तो महात्मा गाँधी ने तीसरा विकल्प झंडा गान के रूप में दिया - " विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊँचा रहे हमारा" लेकिन नेहरु जी उस पर भी तैयार नहीं हुवे नेहरु जी बोले कि झंडा गान ओर्केस्ट्रा पर नहीं बज सकता और जन गण मन ओर्केस्ट्रा पर बज सकता है
और उस दौर में नेहरु मतलब वीटो हुवा करता था यानी नेहरु भारत है, भारत नेहरु है ऐसा था नेहरु जी ने जो कह दिया वो पत्थर की लकीर नेहरु जी ने जो कह दिया वो कानून होता था नेहरु ने गन गण मन को राष्ट्र गान घोषित कर दिया और जबरदस्ती भरतीयों पर इसे थोप दिया गया जबकि इसके जो बोल है उनका अर्थ कुछ और ही कहानी प्रस्तुत करते है -
" भारत के नागरिक, भारत की जनता अपने मन से आपको (अंग्रेजो को) भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है हे अधिनायक (तानाशाह/सुपर हीरो) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो तुम्हारी जय हो ! जय हो ! जय हो ! तुम्हारे भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब सिंध गुजरात महारास्त्र, बंगाल आदि और जितनी भी नदियाँ जैसे यमुना गंगा ये सभी हर्षित है खुश है प्रसन्न है ............. तुम्हारा नाम लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है तुम्हारी ही हम गाथा गाते है हे भारत के भाग्य विधाता (सुपर हीरो ) तुम्हारी जय हो! जय हो ! जय हो ! "
हाल ही में भारत सरकार द्वारा एक सर्वे हुवा जो अर्जुन सिंह की मिनिस्टरी में था इसमें लोगों से पुछा गया था कि आपको जन गण मन और वन्देमातरम में से कौनसा गीत ज्यादा अच्छा लगता है तो 98 .8 % लोगो ने कहा है वन्देमातरम उसके बाद बीबीसी ने एक सर्वे किया उसने पूरे संसार में जहाँ जहाँ भी भारत के लोग रहते थे उनसे पुछा कि आपको दोनों में से कौनसा ज्यादा पसंद है तो 99 % लोगों ने कहा वन्देमातरम बीबीसी के इस सर्वे से एक बात और साफ़ हुई कि पूरी दुनिया में दुसरे नंबर पर वन्देमातरम लोकप्रिय है कई देश है जिनको ये समझ में नहीं आता है लेकिन वो कहते है कि इसमें जो लय है उससे एक जज्बा पैदा होता है
............... तो ये इतिहास है वन्दे मातरम का और जन गण मन का अब आप तय करे क्या गाना है ?---व्यवस्था परिवर्तन
पिछले 65 सालों से हम सरकारे बदल-बदल कर देख चुके है..................... हर समस्या के मूल में मौजूदा त्रुटिपूर्ण संविधान है, जिसके सारे के सारे कानून / धाराएँ अंग्रेजो ने बनाये थे भारत की गुलामी को स्थाई बनाने के लिए ...........इसी त्रुटिपूर्ण संविधान के लचीले कानूनों की आड़ में पिछले 65 सालों से भारत लुट रहा है ............... इस बार सरकार नहीं बदलेगी ...................... अबकी बार व्यवस्था परिवर्तन होगा...................
अंग्रेजो के द्वारा रविंद्रनाथ टेगोर पर दबाव बनाया कि तुम्हे एक गीत जोर्ज पंचम के स्वागत में लिखना ही होगा मजबूरी में रविंद्रनाथ टेगोर ने बेमन से वो गीत लिखा जिसके बोल है - जन गण मन अधिनायक जय हो भारत भाग्य विधाता .... जिसका अर्थ समझने पर पता लगेगा कि ये तो हकीक़त में ही अंग्रेजो कि खुसामद में लिखा गया था इस राष्ट्र गान का अर्थ कुछ इस तरह से होता है -
" भारत के नागरिक, भारत की जनता अपने मन से आपको (अंग्रेजो को) भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है हे अधिनायक (तानाशाह/सुपर हीरो) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो तुम्हारी जय हो ! जय हो ! जय हो ! तुम्हारे भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब सिंध गुजरात महारास्त्र, बंगाल आदि और जितनी भी नदियाँ जैसे यमुना गंगा ये सभी हर्षित है खुश है प्रसन्न है ............. तुम्हारा नाम लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है तुम्हारी ही हम गाथा गाते है हे भारत के भाग्य विधाता (सुपर हीरो ) तुम्हारी जय हो! जय हो ! जय हो ! "
रविन्द्र नाथ टेगोर के बहनोई, सुरेन्द्र नाथ बनर्जी लन्दन में रहते थे और IPS ऑफिसर थे अपने बहनोई को उन्होंने एक लैटर लिखा इसमें उन्होंने लिखा है कि ये गीत जन गण मन अंग्रेजो के द्वारा मुझ पर दबाव डलवाकर लिखवाया गया है इसके शब्दों का अर्थ अच्छा नहीं है इसको न गाया जाये तो अच्छा है लेकिन अंत में उन्होंने लिख दिया कि इस चिठ्ठी को किसी को नहीं बताया जाये लेकिन कभी मेरी म्रत्यु हो जाये तो सबको बता दे
जोर्ज पंचम भारत आया 1911 में और उसके स्वागत में ये गीत गया गया जब वो इंग्लैंड चला गया तो उसने उस जन गण मन का अंग्रेजी में अनुवाद करवाया क्योंकि जब स्वागत हुवा तब उसके समझ में नहीं आया कि ये गीत क्यों गाया गया जब अंग्रेजी अनुवाद उसने सुना तो वह बोला कि इतना सम्मान और इतनी खुशामद तो मेरी आज तक इंग्लॅण्ड में भी किसी ने नहीं की वह बहुत खुश हुवा उसने आदेश दिया कि जिसने भी ये गीत उसके लिए लिखा है उसे इंग्लैंड बुलाया जाये रविन्द्र नाथ टैगोरे इंग्लैंड गए जोर्ज पंचम उस समय नोबल पुरुष्कार समिति का अध्यक्ष भी था उसने रविन्द्र नाथ टैगोरे को नोबल पुरुष्कार से सम्मानित करने का फैसला किया तो रविन्द्र नाथ टैगोरे ने इस नोबल पुरुष्कार को लेने से मना कर दिया क्यों कि गाँधी जी ने बहुत बुरी तरह से रविन्द्रनाथ टेगोर को उनके इस गीत के लिए खूब सुनाया टेगोर ने कहा कि आप मुझे नोबल पुरुष्कार देना ही चाहते हो तो मैंने एक गीतांजलि नामक रचना लिखी है उस पर मुझे दे दो जोर्ज पंचम मान गया और रविन्द्र नाथ टेगोर को सन 1913 में नोबल पुरुष्कार दिया गया उस समय रविन्द्र नाथ टेगोर का परिवार अंग्रेजो के बहुत नजदीक था
जब सन 1919 में जलियावाला बाग़ का कांड हुवा, जिसमे निहत्थे और निर्दोष लोगों पर अंग्रेजो ने गोलिया बरसाई तो गाँधी जी ने एक चिट्ठी रविन्द्र नाथ टेगोर को लिखी जिसमे शब्द-शब्द में गालियाँ थी फिर गाँधी जी स्वयं रविन्द्र नाथ टेगोर से मिलने गए और बहुत जोर से डाटा कि अभी तक अंग्रेजो की अंध भक्ति में डूबे हुवे हो? अब भी अगर तुम्हारी ऑंखें नहीं खुली तो कब खुलेगी ? इस काण्ड के बाद टेगोर ने विरोध किया और नोबल पुरुष्कार अंग्रेजी हुकूमत को लौटा दिया सन 1919 से पहले जितना कुछ भी रविन्द्र नाथ टेगोर ने लिखा वो अंग्रेजी हुकूमत के पक्ष में था और 1919 के बाद उनके लेख कुछ कुछ अंग्रेजो के खिलाफ होने लगे थे 7 अगस्त 1941 को उनकी म्रत्यु हो गई और उनकी म्रत्यु के बाद उनके बहनोई ने रविंद्रनाथ टेगोर के कहे अनुसार वो चिट्ठी सार्वजनिक कर दी
1941 तक कांग्रेस पार्टी थोड़ी उभर चुकी थी लेकिन वह दो खेमो में बाँट गई जिसमे एक खेमे के समर्थक बाल गंगाधर तिलक थे और दूसरे खेमे में मोती लाल नेहरु थे मतभेद था सरकार बनाने का मोती लाल नेहरु चाहते थे कि स्वतंत्र भारत की सरकार अंग्रेजो के साथ कोई संयोजक सरकार बने जबकि गंगाधर तिलक कहते थे कि अंग्रेजो के साथ मिलकर सरकार बनाना तो भारत के लोगों को धोखा देना है इस मतभेद के कारण लोकमान्य तिलक कांग्रेस से निकल गए और गरम दल इन्होने बनाया कोंग्रेस के दो हिस्से हो गए एक नरम दल और एक गरम दल गरम दल के नेता थे लोकमान्य तिलक, लाला लाजपत राय ये हर जगह वन्दे मातरम गाया करते थे और गरम दल के नेता थे मोती लाल नेहरु लेकिन नरम दल वाले ज्यादातर अंग्रेजो के साथ रहते थे उनके साथ रहना, उनको सुनना , उनकी मीटिंगों में शामिल होना हर समय अंग्रेजो से समझोते में रहते थे वन्देमातरम से अंग्रेजो को बहुत चिढ होती थी नरम दल वाले गरम दल को चिढाने के लिए 1911 में लिखा गया गीत जन गण मन अपने हर समारोह में गाया करते थे
नरम दल ने उस समय एक वायरस छोड़ दिया कि मुसलमानों को वन्दे मातरम नहीं गाना चाहिए क्यों कि इसमें बुतपरस्ती (मूर्ती पूजा) है और आप जानते है कि मुसलमान मूर्ति पूजा के कट्टर विरोधी है उस समय मुस्लिम लीग भी बन गई थी जिसके प्रमुख मोहम्मद अली जिन्ना थे उन्होंने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया और मुसलमानों को वन्दे मातरम गाने से मना कर दिया इसी झगडे के चलते सन 1947 को भारत आजाद हुआ
जब भारत सन 1947 में आजाद हो गया तो जवाहर लाल नेहरु ने इसमें राजनीति कर डाली संविधान सभा की बहस चली जितने भी 319 सांसद थे उनमे से 318 सांसद ने बंकिमदास चटर्जी द्वारा लिखित वन्देमातरम को राष्ट्रगान स्वीकार करने पर सहमती जताई बस एक सांसद ने इस प्रस्ताव को नहीं माना और उस एक सांसद का नाम था पंडित जवाहर लाल नेहरु वो कहने लगे कि क्यों कि वन्दे मातरम से मुसलमानों के दिल को चोट पहुंचती है इसलिए इसे नहीं गाना चाहिए (यानी हिन्दुओ को चोट पहुंचे तो ठीक है मगर मुसलमानों को चोट नहीं पहुंचनी चाहिए)
अब इस झगडे का फैसला कोन करे ? तो वे पहुचे गाँधी जी के पास गाँधी जी ने कहा कि जन गण मन के पक्ष में तो मै भी नहीं हूँ और तुम (नेहरु ) वन्देमातरम के पक्ष में नहीं हो तो कोई तीसरा गीत निकालो तो महात्मा गाँधी ने तीसरा विकल्प झंडा गान के रूप में दिया - " विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊँचा रहे हमारा" लेकिन नेहरु जी उस पर भी तैयार नहीं हुवे नेहरु जी बोले कि झंडा गान ओर्केस्ट्रा पर नहीं बज सकता और जन गण मन ओर्केस्ट्रा पर बज सकता है
और उस दौर में नेहरु मतलब वीटो हुवा करता था यानी नेहरु भारत है, भारत नेहरु है ऐसा था नेहरु जी ने जो कह दिया वो पत्थर की लकीर नेहरु जी ने जो कह दिया वो कानून होता था नेहरु ने गन गण मन को राष्ट्र गान घोषित कर दिया और जबरदस्ती भरतीयों पर इसे थोप दिया गया जबकि इसके जो बोल है उनका अर्थ कुछ और ही कहानी प्रस्तुत करते है -
" भारत के नागरिक, भारत की जनता अपने मन से आपको (अंग्रेजो को) भारत का भाग्य विधाता समझती है और मानती है हे अधिनायक (तानाशाह/सुपर हीरो) तुम्ही भारत के भाग्य विधाता हो तुम्हारी जय हो ! जय हो ! जय हो ! तुम्हारे भारत आने से सभी प्रान्त पंजाब सिंध गुजरात महारास्त्र, बंगाल आदि और जितनी भी नदियाँ जैसे यमुना गंगा ये सभी हर्षित है खुश है प्रसन्न है ............. तुम्हारा नाम लेकर ही हम जागते है और तुम्हारे नाम का आशीर्वाद चाहते है तुम्हारी ही हम गाथा गाते है हे भारत के भाग्य विधाता (सुपर हीरो ) तुम्हारी जय हो! जय हो ! जय हो ! "
हाल ही में भारत सरकार द्वारा एक सर्वे हुवा जो अर्जुन सिंह की मिनिस्टरी में था इसमें लोगों से पुछा गया था कि आपको जन गण मन और वन्देमातरम में से कौनसा गीत ज्यादा अच्छा लगता है तो 98 .8 % लोगो ने कहा है वन्देमातरम उसके बाद बीबीसी ने एक सर्वे किया उसने पूरे संसार में जहाँ जहाँ भी भारत के लोग रहते थे उनसे पुछा कि आपको दोनों में से कौनसा ज्यादा पसंद है तो 99 % लोगों ने कहा वन्देमातरम बीबीसी के इस सर्वे से एक बात और साफ़ हुई कि पूरी दुनिया में दुसरे नंबर पर वन्देमातरम लोकप्रिय है कई देश है जिनको ये समझ में नहीं आता है लेकिन वो कहते है कि इसमें जो लय है उससे एक जज्बा पैदा होता है
............... तो ये इतिहास है वन्दे मातरम का और जन गण मन का अब आप तय करे क्या गाना है ?---व्यवस्था परिवर्तन
पिछले 65 सालों से हम सरकारे बदल-बदल कर देख चुके है..................... हर समस्या के मूल में मौजूदा त्रुटिपूर्ण संविधान है, जिसके सारे के सारे कानून / धाराएँ अंग्रेजो ने बनाये थे भारत की गुलामी को स्थाई बनाने के लिए ...........इसी त्रुटिपूर्ण संविधान के लचीले कानूनों की आड़ में पिछले 65 सालों से भारत लुट रहा है ............... इस बार सरकार नहीं बदलेगी ...................... अबकी बार व्यवस्था परिवर्तन होगा...................
Tuesday, January 22, 2013
रखिए ये शॉर्टकट्स याद और बिना माउस कीजिए कम्प्यूटर पर काम!
WINDOWS KEY + E के से आप My Computer खोल सकते हैं।
कंट्रोल बटन दबाए रखते हुए किसी भी फाइल को माउस से ड्रैग करें। उसकी एक और कॉपी बन जाएगी।
Control+Shift को दबाते हुए माउस से किसी भी प्रोग्राम, फाइल, फोल्डर, ड्राइव को ड्रैग करें। इसका शॉर्टकट हाजिर हो जाएगा।
काम करते-करते कहीं जाना पड़े तो Windows+L बटन दबाकर सिस्टम को लॉक करके जाएं। यह तभी काम करेगा जब कोई विंडो खुली हो और कम्प्यूटर किसी पासवर्ड से खुलता हो।
डिलीट की हुई फाइलें सिस्टम से पूरी तरह डिलीट नहीं होतीं, बल्कि रिसाइकिल बिन में चली जाती हैं, जहां से उन्हें दोबारा लाया जा सकता है। अगर किसी फाइल को हमेशा के लिए डिलीट करना है तो Shift+Delete कॉम्बीनेशन आजमाएं
अगर माउस को राइट क्लिक किए बिना उसका काम करना चाहते हैं तो Shift+F10 को आजमाएं।।
माउस को हाथ लगाए बिना स्टार्ट मेन्यू खोलने के लिए Control+Esc का इस्तेमाल करें।
किसी फाइल या फोल्डर को री-नेम करने के लिए माउस को राइट क्लिक कर सिर्फ F2 दबाकर देखें।
किसी फाइल को खोजना चाहते हैं, तो F3 को दबाकर सर्च विंडो खोलें।
किसी फाइल, फोल्डर या ड्राइव आदि की प्रॉपर्टीज देखने के लिए Alt+Enter दबाएं।
डेस्कटॉप पर बहुत सारे प्रोग्राम खुले हों, तो सबको एक साथ मिनिमाइज करने के लिए Windows Key+M यूज करें।
मिनिमाइज किए हुए सभी प्रोग्राम्स और फाइलों को मैक्सिमाइज करने के लिए Windows Key +shift+M को आजमाएं।
डेस्कटॉप पर खुले कई सारे डॉक्युमेंट्स या प्रोग्राम्स में से किसी एक को सिलेक्ट करने के लिए Alt+Tab को बार-बार दबाकर देखें।
किसी भी चल रहे प्रोग्राम को बंद करने के लिए Alt+F4 दबाएं।
मल्टिपल सिलेक्ट:
एक से ज्यादा फाइलों को Copy Move करना हो, तो उनकी सूची में पहली फाइल पर जाने के बाद Shift दबाएं और अब Arrow बटन दबाकर ऊपर-नीचे बढ़ते जाएं। किसी डॉक्युमेंट में एक से ज्यादा लाइनों को सिलेक्ट करने के लिए भी Shift+Arrow की मदद लें।
माय कम्प्यूटर या इंटरनेट एक्सप्लोरर में एड्रेस बार में मौजूद दस्तावेजों या वेब यूआरएल की सूची को खोलने के लिए F4 दबाएं
पेज रिफ्रेश:
अगर My Computer या Desktop या Internet Explorer को Refresh करना चाहते हैं तो F5 दबाएं।
टास्क बंद करें:
किसी भी सॉफ्टवेयर में काम करते समय खुलने वाले डायलॉग बॉक्स (जैसे क्या आप वाकई यह फाइल डिलीट करना चाहते हैं?) को बंद करने और उसे कैंसल करने के लिए Escape बटन दबाने से भी काम चल जाता है। इसी तरह, ‘हां’ के लिए Enter दबाना काफी है।
मेन्यू खोलें:
किसी भी सॉफ्टवेयर के मेन्यू में Alt दबाने के बाद अंडरलाइन किए हुए अक्षरों (जैसे फाइल में एफ और एडिट में ई) पर क्लिक करने से वह मेन्यू खुल जाएगा। उसके बाद सब-मेन्यू में दिए गए बटन भी इसी तरह खोले जा सकते हैं।
कंप्यूटर सर्च:
अगर आप अपने नेटवर्क में मौजूद किसी खास कंप्यूटर को खोजना चाहते हैं, तो Control+Windows Logo+F का इस्तेमाल करें।
कंट्रोल बटन दबाए रखते हुए किसी भी फाइल को माउस से ड्रैग करें। उसकी एक और कॉपी बन जाएगी।
Control+Shift को दबाते हुए माउस से किसी भी प्रोग्राम, फाइल, फोल्डर, ड्राइव को ड्रैग करें। इसका शॉर्टकट हाजिर हो जाएगा।
काम करते-करते कहीं जाना पड़े तो Windows+L बटन दबाकर सिस्टम को लॉक करके जाएं। यह तभी काम करेगा जब कोई विंडो खुली हो और कम्प्यूटर किसी पासवर्ड से खुलता हो।
डिलीट की हुई फाइलें सिस्टम से पूरी तरह डिलीट नहीं होतीं, बल्कि रिसाइकिल बिन में चली जाती हैं, जहां से उन्हें दोबारा लाया जा सकता है। अगर किसी फाइल को हमेशा के लिए डिलीट करना है तो Shift+Delete कॉम्बीनेशन आजमाएं
अगर माउस को राइट क्लिक किए बिना उसका काम करना चाहते हैं तो Shift+F10 को आजमाएं।।
माउस को हाथ लगाए बिना स्टार्ट मेन्यू खोलने के लिए Control+Esc का इस्तेमाल करें।
किसी फाइल या फोल्डर को री-नेम करने के लिए माउस को राइट क्लिक कर सिर्फ F2 दबाकर देखें।
किसी फाइल को खोजना चाहते हैं, तो F3 को दबाकर सर्च विंडो खोलें।
किसी फाइल, फोल्डर या ड्राइव आदि की प्रॉपर्टीज देखने के लिए Alt+Enter दबाएं।
डेस्कटॉप पर बहुत सारे प्रोग्राम खुले हों, तो सबको एक साथ मिनिमाइज करने के लिए Windows Key+M यूज करें।
मिनिमाइज किए हुए सभी प्रोग्राम्स और फाइलों को मैक्सिमाइज करने के लिए Windows Key +shift+M को आजमाएं।
डेस्कटॉप पर खुले कई सारे डॉक्युमेंट्स या प्रोग्राम्स में से किसी एक को सिलेक्ट करने के लिए Alt+Tab को बार-बार दबाकर देखें।
किसी भी चल रहे प्रोग्राम को बंद करने के लिए Alt+F4 दबाएं।
मल्टिपल सिलेक्ट:
एक से ज्यादा फाइलों को Copy Move करना हो, तो उनकी सूची में पहली फाइल पर जाने के बाद Shift दबाएं और अब Arrow बटन दबाकर ऊपर-नीचे बढ़ते जाएं। किसी डॉक्युमेंट में एक से ज्यादा लाइनों को सिलेक्ट करने के लिए भी Shift+Arrow की मदद लें।
माय कम्प्यूटर या इंटरनेट एक्सप्लोरर में एड्रेस बार में मौजूद दस्तावेजों या वेब यूआरएल की सूची को खोलने के लिए F4 दबाएं
पेज रिफ्रेश:
अगर My Computer या Desktop या Internet Explorer को Refresh करना चाहते हैं तो F5 दबाएं।
टास्क बंद करें:
किसी भी सॉफ्टवेयर में काम करते समय खुलने वाले डायलॉग बॉक्स (जैसे क्या आप वाकई यह फाइल डिलीट करना चाहते हैं?) को बंद करने और उसे कैंसल करने के लिए Escape बटन दबाने से भी काम चल जाता है। इसी तरह, ‘हां’ के लिए Enter दबाना काफी है।
मेन्यू खोलें:
किसी भी सॉफ्टवेयर के मेन्यू में Alt दबाने के बाद अंडरलाइन किए हुए अक्षरों (जैसे फाइल में एफ और एडिट में ई) पर क्लिक करने से वह मेन्यू खुल जाएगा। उसके बाद सब-मेन्यू में दिए गए बटन भी इसी तरह खोले जा सकते हैं।
कंप्यूटर सर्च:
अगर आप अपने नेटवर्क में मौजूद किसी खास कंप्यूटर को खोजना चाहते हैं, तो Control+Windows Logo+F का इस्तेमाल करें।
Tuesday, September 25, 2012
भारत में विदेशी किराना स्टोर के मायने
हाल ही में प्रधानमंत्री ने भारतीय खुदरा बाजार में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में एकल ब्रांड में १००% व मल्टीब्रांड में ५१% निवेश की अनुमती दी | इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिये आर्थिक सुधारों कि सज्ञां दि जा रही है| इसके पक्ष और विपक्ष में अनेक चर्चाओं चली वदोनों तरफ से अपने अपने तर्क दिए | प्रधानमंत्री ने देश के नाम संबोधन में अपना पक्ष रखा और आर्थिक सुधारों के सकारात्मक प्रभाव का भरोसा दिलाया|
बताया जा रहा कि इससे किसानों को अपने उत्पादन कि अच्छी कीमत मिलेगी तथा नई तकनीक उपलब्ध होगी| लेकिन आंकड़े बताते ह कि अमेरिका इंगलैंड मेक्सिको में अफडीआई कि नीतियों से तंग आकर किसान कर्षि वयवसाय को छोड़ रहे ह| बताया जा रहा
ह कि इससे बिचोलिये के हट जाने से उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को फायदा मिलेगा पर सवालयह कि ये बिचोलीये कोन ह ये हम में से ही कुछ लोग ह जो परिवहन व स्टोर करने का काम करते ह तो इसमे इनको रोजगार मिल जाने में बुराई क्या ह ? पर विपक्ष का तर्क ये कि इससे उत्पाद महंगा हो जाता ह इस पर मेरा तर्क ये ह कि अभी हमारे देश जो स्टोर ह वो कोनसे सस्ते उत्पाद उपलब्ध करा रहे ह RELIANCE BIG BAJAR MOREआदि इनके बीच तो बिचोलिये भी नहीं ह तो क्या गारंटी ह कि FDI RETAIL के आने से सस्ते उत्पाद उपलब्ध होंगे|
FDI RTAIL के आने से बताया जा रहा ह कि रोजगार में अवसर बढ़ेंगे परन्तु भारतीय खुदरा बाजार 4करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता ह इसका विकल्प fdi retail नहीं हो सकताहै | 4करोड़ लोगों का रोजगार FDI RETAIL शायद सारे विश्व में नहीं देता होगा
विदेशी किराना स्टोर के आने से भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश होगा इससे हमारी अर्थव्यवस्था मजबूतहोगी पर ये लोग ये भूल जाते ह कि विदेशी किराना स्टोर 70% उत्पाद विदेशों से आयात करेगीं इससे भारतीय मुद्रा विदेशों में जाएगी रुपए का मूल्य गिरेगा | भारतीय उधोग चोपट होंगे और हम कहते ह अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
एक बार सोचने कि जरूरत है|
बताया जा रहा कि इससे किसानों को अपने उत्पादन कि अच्छी कीमत मिलेगी तथा नई तकनीक उपलब्ध होगी| लेकिन आंकड़े बताते ह कि अमेरिका इंगलैंड मेक्सिको में अफडीआई कि नीतियों से तंग आकर किसान कर्षि वयवसाय को छोड़ रहे ह| बताया जा रहा
ह कि इससे बिचोलिये के हट जाने से उत्पादक और उपभोक्ता दोनों को फायदा मिलेगा पर सवालयह कि ये बिचोलीये कोन ह ये हम में से ही कुछ लोग ह जो परिवहन व स्टोर करने का काम करते ह तो इसमे इनको रोजगार मिल जाने में बुराई क्या ह ? पर विपक्ष का तर्क ये कि इससे उत्पाद महंगा हो जाता ह इस पर मेरा तर्क ये ह कि अभी हमारे देश जो स्टोर ह वो कोनसे सस्ते उत्पाद उपलब्ध करा रहे ह RELIANCE BIG BAJAR MOREआदि इनके बीच तो बिचोलिये भी नहीं ह तो क्या गारंटी ह कि FDI RETAIL के आने से सस्ते उत्पाद उपलब्ध होंगे|
FDI RTAIL के आने से बताया जा रहा ह कि रोजगार में अवसर बढ़ेंगे परन्तु भारतीय खुदरा बाजार 4करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करता ह इसका विकल्प fdi retail नहीं हो सकताहै | 4करोड़ लोगों का रोजगार FDI RETAIL शायद सारे विश्व में नहीं देता होगा
विदेशी किराना स्टोर के आने से भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश होगा इससे हमारी अर्थव्यवस्था मजबूतहोगी पर ये लोग ये भूल जाते ह कि विदेशी किराना स्टोर 70% उत्पाद विदेशों से आयात करेगीं इससे भारतीय मुद्रा विदेशों में जाएगी रुपए का मूल्य गिरेगा | भारतीय उधोग चोपट होंगे और हम कहते ह अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
एक बार सोचने कि जरूरत है|
Tuesday, April 17, 2012
3rd grade teacher
किस जिले से कितने आवेदन
जिला लेवल वन लेवल टू कुल पद
अजमेर 15716 18616 34332 1491
अलवर 36139 31705 67844 1866
बांसवाड़ा 7452 5069 12521 560
बारां 7062 6373 13435 1232
बाड़मेर 53571 58028 111599
2832
भरतपुर 10740 12005 22745 1140
भीलवाड़ा 26007 34919 60926
1999
बीकानेर 20808 8298 29106 881
बूंदी 8550 8919 17469 826
चित्तौडग़ढ़ 29793 34266 64059
1972
चूरू 16954 193 36331 1081
दौसा 6909 5932 12841 494
धौलपुर 4503 3718 8221 626
डूंगरपुर 2939 289 3228 235
हनुमानगढ़ 11129 11978 23107
751
जयपुर 17495 16357 33852 568
जैसलमेर 86 3919 12695 505
जालौर 22891 24904 495 1478
झालावाड़ 15121 18011 33132
1465
झुंझुनू 228 151 379 20
जोधपुर 42457 13022 55479 1677
करौली 6389 5066 11455 472
कोटा 5810 5654 11464 692
नागौर 53031 51797 104828
3022
पाली 47663 52029 99692 2614
प्रतापगढ़ 10276 7362 17638
1174
राजसमंद 39079 46735 85814
2072
स.माधोपुर6630 5113 11743 473
सीकर 16255 14791 31046 704
सिरोही 5153 4330 9483 720
श्रीगंगानगर15890 14736 30626
1038
टोंक 7821 7112 14933 586
उदयपुर 22782 18887 41669 2278
राज्य में स्थिति
आवेदन पद
1171487 39544
लेवल वन
602019 10609
लेवल टू
569468 28935
जयपुर में लेवल वन के 155 पद, 17495
आवेदन आए
जिला लेवल वन लेवल टू कुल पद
अजमेर 15716 18616 34332 1491
अलवर 36139 31705 67844 1866
बांसवाड़ा 7452 5069 12521 560
बारां 7062 6373 13435 1232
बाड़मेर 53571 58028 111599
2832
भरतपुर 10740 12005 22745 1140
भीलवाड़ा 26007 34919 60926
1999
बीकानेर 20808 8298 29106 881
बूंदी 8550 8919 17469 826
चित्तौडग़ढ़ 29793 34266 64059
1972
चूरू 16954 193 36331 1081
दौसा 6909 5932 12841 494
धौलपुर 4503 3718 8221 626
डूंगरपुर 2939 289 3228 235
हनुमानगढ़ 11129 11978 23107
751
जयपुर 17495 16357 33852 568
जैसलमेर 86 3919 12695 505
जालौर 22891 24904 495 1478
झालावाड़ 15121 18011 33132
1465
झुंझुनू 228 151 379 20
जोधपुर 42457 13022 55479 1677
करौली 6389 5066 11455 472
कोटा 5810 5654 11464 692
नागौर 53031 51797 104828
3022
पाली 47663 52029 99692 2614
प्रतापगढ़ 10276 7362 17638
1174
राजसमंद 39079 46735 85814
2072
स.माधोपुर6630 5113 11743 473
सीकर 16255 14791 31046 704
सिरोही 5153 4330 9483 720
श्रीगंगानगर15890 14736 30626
1038
टोंक 7821 7112 14933 586
उदयपुर 22782 18887 41669 2278
राज्य में स्थिति
आवेदन पद
1171487 39544
लेवल वन
602019 10609
लेवल टू
569468 28935
जयपुर में लेवल वन के 155 पद, 17495
आवेदन आए
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