बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़े सह
नहीं पाया,
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह
नहीं पाया,
अधूरा अनसुना ही रह गया यूं प्यार
का किस्सा,
कभी तुम सुन नहीं पायी, कभी मैं कह
नहीं पाया
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''या तो सरगां ने सरमावे, इण पर देव रमण ने आवे। इणरो यश नर-नारी गावे, धरती धोराँ री, मीठा मोराँ री''
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Saturday, November 19, 2011
Saturday, November 12, 2011
Sunday, November 6, 2011
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