Popular Posts

Saturday, November 19, 2011

KUMAR VISVASH

बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़े सह
नहीं पाया,
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह
नहीं पाया,
अधूरा अनसुना ही रह गया यूं प्यार
का किस्सा,
कभी तुम सुन नहीं पायी, कभी मैं कह
नहीं पाया

Saturday, November 12, 2011

जनाजा

"मेरा जनाजा निकला उनकी गली से
तो सारा जहां निकला
जिसके लिये मेरा जनाजा निकला वह
कम्बख्त घर से न निकला"

SHER

कहां मैखाने का दरवाजा ''गालिब'' और
कहां वाइज
पर इतना जानते हैं कल
वो जाता था कि हम निकले
- गालिब